छत्तीसगढ़

तीजा पर्व पर अनोखी पहल: पार्षद आकाश तिवारी ने 1200 महिलाओं को किया करेला भेंट

Shantanu Roy
25 Aug 2025 9:27 PM IST
तीजा पर्व पर अनोखी पहल: पार्षद आकाश तिवारी ने 1200 महिलाओं को किया करेला भेंट
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में तीजा पर्व का विशेष महत्व है। इस पर्व की शुरुआत कड़ू भात (करेला-भात) से होती है। मान्यता है कि तीजा व्रत से एक दिन पहले महिलाएं करेला-भात खाती हैं और अगले दिन निर्जला उपवास रखती हैं। यही वजह है कि तीजा से पहले करेले का खास महत्व होता है। इसी परंपरा को जीवित और सम्मानित रखने के लिए राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड के पार्षद और नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने एक अनूठी पहल करते हुए वार्ड की लगभग 1200 महिलाओं को करेला भेंट किया।
घर-घर जाकर किया वितरण
सोमवार सुबह से ही पार्षद आकाश तिवारी और उनकी टीम वार्ड की गलियों में घर-घर पहुंचे। महिलाओं को तीजा पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने करेला भेंट किया। इस पहल का उद्देश्य परंपरा को सहेजना और महिलाओं को महंगाई के दौर में थोड़ी मदद देना था। स्थानीय लोगों ने इसे एक सराहनीय कदम बताया।
बढ़ गई करेले की मांग, महंगाई से महिलाएं परेशान
तीजा के ठीक पहले करेले की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसकी कीमत 80 से 100 रुपए किलो तक पहुंच गई है। महंगाई के इस दौर में कई परिवारों के लिए त्योहार की परंपराएं निभाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में महिलाओं को मुफ्त करेला भेंट करना उनके लिए बड़ी राहत और खुशी की बात रही।
महिलाओं ने जताया आभार, दिया आशीर्वाद
करेला प्राप्त करने वाली महिलाओं ने पार्षद आकाश तिवारी के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह न केवल धार्मिक परंपरा का सम्मान है, बल्कि समाज में महिलाओं को सम्मान देने का भी प्रतीक है। महिलाओं ने पार्षद को तीजा पर्व की शुभकामनाएं और आशीर्वाद भी दिया।
तीजा पर्व का महत्व
छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व का विशेष महत्व है। इसे हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत से एक दिन पहले करेला-भात खाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी का मेल
आकाश तिवारी की इस पहल को परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा संगम बताया जा रहा है। महंगाई और बदलती जीवनशैली के बीच जब कई लोग परंपराओं से दूर हो रहे हैं, ऐसे समय में इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है। आकाश तिवारी ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़ा पर्व है। इसे संजोना हर किसी का दायित्व है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगे भी वे इसी तरह समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करते रहेंगे।
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